अस कपि एक न सेना माहीं

चौपाई २, दोहा २२ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कपि एक न सेना माहीं। राम कुसल जेहि पूछी नाहीं॥ यह कछु नहिं प्रभु कइ अधिकाई। बिस्वरूप ब्यापक रघुराई॥ २ ॥

अर्थ

सेना में एक भी वानर ऐसा नहीं था जिससे श्रीरामजी ने कुशल न पूछी हो। प्रभु के लिये यह कोई बड़ी बात नहीं है; क्योंकि श्रीरघुनाथजी विश्वरूप तथा सर्वव्यापक हैं (सारे रूपों और सब स्थानों में हैं)।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान