तब सुग्रीव बिकल होइ भागा

चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

तब सुग्रीव बिकल होइ भागा। मुष्टि प्रहार बज्र सम लागा॥ मैं जो कहा रघुबीर कृपाला। बंधु न होइ मोर यह काला॥ २ ॥

अर्थ

तब सुग्रीव व्याकुल होकर भागा। घूँसे की चोट उसे वज्र के समान लगी। [सुग्रीव ने आकर कहा—] हे कृपालु रघुवीर! मैंने आपसे पहले ही कहा था कि बालि मेरा भाई नहीं, यह काल है।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।

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बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार