एकरूप तुम्ह भ्राता दोऊ

चौपाई ३, दोहा ८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

एकरूप तुम्ह भ्राता दोऊ। तेहि भ्रम तें नहिं मारेउँ सोऊ॥ कर परसा सुग्रीव सरीरा। तनु भा कुलिस गई सब पीरा॥ ३ ॥

अर्थ

[श्रीरामजी ने कहा—] तुम दोनों भाइयों का एक-सा ही रूप है। इसी भ्रम से मैंने उसको नहीं मारा। फिर श्रीरामजी ने सुग्रीव के शरीर को हाथ से स्पर्श किया, जिससे उसका शरीर वज्र के समान हो गया और सारी पीड़ा जाती रही।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।

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बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार