अस कहि चला महा अभिमानी

चौपाई १, दोहा ८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कहि चला महा अभिमानी। तृन समान सुग्रीवहि जानी॥ भिरे उभौ बाली अति तर्जा। मुठिका मारि महाधुनि गर्जा॥ १ ॥

अर्थ

ऐसा कहकर वह महान् अभिमानी बालि सुग्रीव को तिनके के समान जानकर चला। दोनों भिड़ गये। बालि ने सुग्रीव को बहुत धमकाया और घूँसा मारकर बड़े जोर से गरजा।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।

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बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार