तब हनुमंत उभय दिसि की सब
तब हनुमंत उभय दिसि की सब
दोहा ४ · किष्किन्धाकाण्ड
दोहा पाठ
तब हनुमंत उभय दिसि की सब कथा सुनाइ। पावक साखी देइ करि जोरी प्रीति दृढ़ाइ॥ ४ ॥
अर्थ
तब हनुमानजी ने दोनों ओर की सब कथा सुनाकर अग्नि को साक्षी देकर जोड़ी प्रीति दृढ़ाई (अर्थात् अग्नि की साक्षी देकर प्रतिज्ञापूर्वक उनकी मैत्री करवा दी)।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का दोहा ४ है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।
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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता