सादर मिलेउ नाइ पद माथा

चौपाई ४, दोहा ४ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

सादर मिलेउ नाइ पद माथा। भेंटेउ अनुज सहित रघुनाथा॥ कपि कर मन बिचार एहि रीती। करिहहिं बिधि मो सन ए प्रीती॥ ४ ॥

अर्थ

सुग्रीव ने चरणों में मस्तक नवाकर आदरसहित मिले। श्रीरघुनाथजी भी छोटे भाई सहित उनसे गले लगकर मिले। सुग्रीव मन में इस प्रकार सोच रहे हैं कि हे विधाता! क्या ये मुझसे प्रीति करेंगे?

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।

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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता