सुनि सुग्रीवँ परम भय माना

चौपाई २, दोहा १९ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि सुग्रीवँ परम भय माना। बिषयँ मोर हरि लीन्हेउ ग्याना॥ अब मारुतसुत दूत समूहा। पठवहु जहँ तहँ बानर जूहा॥ २ ॥

अर्थ

हनुमानजी के वचन सुनकर सुग्रीव ने बहुत ही भय माना। [और कहा--] विषयों ने मेरे ज्ञान को हर लिया। अब हे पवनसुत! जहाँ-तहाँ वानरों के यूथ रहते हैं; वहाँ दूतों के समूहों को भेजो।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा बाद सुग्रीव की उदासीनता पर राम का असंतोष और लक्ष्मण का कोपसहित किष्किंधा-प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप