कहहु पाख महुँ आव न जोई
कहहु पाख महुँ आव न जोई
चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
कहहु पाख महुँ आव न जोई। मोरें कर ता कर बध होई॥ तब हनुमंत बोलाए दूता। सब कर करि सनमान बहूता॥ ३ ॥
अर्थ
और कहला दो कि एक पखवाड़े में (पंद्रह दिनों में) जो न आ जायगा, उसका मेरे हाथों वध होगा। तब हनुमानजी ने दूतों को बुलाया और सबका बहुत सम्मान करके--।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा बाद सुग्रीव की उदासीनता पर राम का असंतोष और लक्ष्मण का कोपसहित किष्किंधा-प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप