सुनि खग हरष सोक जुत बानी
सुनि खग हरष सोक जुत बानी
चौपाई ५, दोहा २७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि खग हरष सोक जुत बानी। आवा निकट कपिन्ह भय मानी॥ तिन्हहि अभय करि पूछेसि जाई। कथा सकल तिन्ह ताहि सुनाई॥ ५ ॥
अर्थ
हर्ष और शोक से युक्त वाणी (समाचार) सुनकर वह पक्षी (सम्पाती) वानरों के पास आया। वानर डर गये। उनको अभय करके (अभय-वचन देकर) उसने पास जाकर जटायु का वृत्तान्त पूछा, तब उन्होंने सारी कथा उसे कह सुनायी।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार