कह अंगद बिचारि मन माहीं

चौपाई ४, दोहा २७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

कह अंगद बिचारि मन माहीं। धन्य जटायू सम कोउ नाहीं॥ राम काज कारन तनु त्यागी। हरि पुर गयउ परम बड़भागी॥ ४ ॥

अर्थ

अंगद ने मन में विचार कर कहा--अहा! जटायु के समान धन्य कोई नहीं है। श्रीरामजी के कार्य के लिये शरीर छोड़कर वह परम बड़भागी भगवान् के परमधाम को चला गया।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।

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संपाती से भेंट और सीता के समाचार