सुनि संपाति बंधु कै करनी
सुनि संपाति बंधु कै करनी
चौपाई ६, दोहा २७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि संपाति बंधु कै करनी। रघुपति महिमा बहुबिधि बरनी॥ ६ ॥
अर्थ
भाई जटायु की करनी सुनकर सम्पाती ने बहुत प्रकार से श्रीरघुनाथजी की महिमा वर्णन की।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार