सोइ गुनग्य सोई बड़भागी

चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

सोइ गुनग्य सोई बड़भागी। जो रघुबीर चरन अनुरागी॥ आयसु मागि चरन सिरु नाई। चले हरषि सुमिरत रघुराई॥ ४ ॥

अर्थ

सद्गुणों को पहचानने वाला (गुणवान्) तथा बड़भागी वही है जो श्रीरघुनाथजी के चरणों का प्रेमी है। आज्ञा माँगकर और चरणों में फिर सिर नवाकर श्रीरघुनाथजी का स्मरण करते हुए सब हर्षित होकर चले।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान