पापिउ जा कर नाम सुमिरहीं

चौपाई २, दोहा २९ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

पापिउ जा कर नाम सुमिरहीं। अति अपार भवसागर तरहीं॥ तासु दूत तुम्ह तजि कदराई। राम हृदयँ धरि करहु उपाई॥ २ ॥

अर्थ

पापी भी जिनका नाम स्मरण करके अत्यन्त अपार भवसागर से तर जाते हैं, तुम उनके दूत हो, अतः कायरता छोड़कर श्रीरामजी को हृदय में धारण करके उपाय करो।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जांबवंत द्वारा हनुमानजी को उनका अपार बल और सामर्थ्य याद दिलाकर समुद्र लांघने के लिए प्रेरित करने का वर्णन है।

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जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना