अस कहि गरुड़ गीध जब गयऊ
अस कहि गरुड़ गीध जब गयऊ
चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
अस कहि गरुड़ गीध जब गयऊ। तिन्ह कें मन अति बिसमय भयऊ॥ निज निज बल सब काहूँ भाषा। पार जाइ कर संसय राखा॥ ३ ॥
अर्थ
[काकभुशुण्डिजी कहते हैं--] हे गरुड़जी! इस प्रकार कहकर जब गीध चला गया, तब उन (वानरों) के मन में अत्यन्त विस्मय हुआ। सब किसी ने अपना-अपना बल कहा, पर समुद्र के पार जाने में सभी ने सन्देह प्रकट किया।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जांबवंत द्वारा हनुमानजी को उनका अपार बल और सामर्थ्य याद दिलाकर समुद्र लांघने के लिए प्रेरित करने का वर्णन है।
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जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना