मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि
सोरठा १ · किष्किन्धाकाण्ड
सोरठा पाठ
मुक्ति जन्म महि जानि ग्यान खानि अघ हानि कर। जहँ बस संभु भवानि सो कासी सेइअ कस न॥ १ ॥
अर्थ
जहाँ श्रीशिव-पार्वती बसते हैं, उस काशी को मुक्ति की जन्मभूमि, ज्ञान की खान और पापों का नाश करनेवाली जानकर उसका सेवन क्यों न किया जाय?।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का सोरठा १ है। इस प्रकरण में किष्किंधाकांड के आरंभ में श्रीराम-नाम, शंकर और काशी की भक्तिमय वंदना का वर्णन है।
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मंगलाचरण