मृदुल मनोहर सुंदर गाता

चौपाई ५, दोहा १ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

मृदुल मनोहर सुंदर गाता। सहत दुसह बन आतप बाता॥ की तुम्ह तीनि देव महँ कोऊ। नर नारायन की तुम्ह दोऊ॥ ५ ॥

अर्थ

मन को हरण करनेवाले आपके सुन्दर, कोमल अंग हैं, और आप वन के दुःसह आतप और वायु को सह रहे हैं। क्या आप ब्रह्मा, विष्णु, महेश—इन तीन देवताओं में से कोई हैं, या आप दोनों नर और नारायण हैं?

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।

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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता