जग कारन तारन भव भंजन धरनी
जग कारन तारन भव भंजन धरनी
दोहा १ · किष्किन्धाकाण्ड
दोहा पाठ
जग कारन तारन भव भंजन धरनी भार। की तुम्ह अखिल भुवन पति लीन्ह मनुज अवतार॥ १ ॥
अर्थ
अथवा आप जगत् के कारण, संसार-तारक, भव-भंजन और पृथ्वी के भार का हरण करनेवाले, सम्पूर्ण भुवनों के स्वामी स्वयं भगवान् हैं, जिन्होंने मनुष्य अवतार लिया है?।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का दोहा १ है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।
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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता