मेली कंठ सुमन कै माला

चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

मेली कंठ सुमन कै माला। पठवा पुनि बल देइ बिसाला॥ पुनि नाना बिधि भई लराई। बिटप ओट देखहिं रघुराई॥ ४ ॥

अर्थ

तब श्रीरामजी ने सुग्रीव के गले में फूलों की माला डाल दी और फिर उसे बड़ा भारी बल देकर भेजा। दोनों में पुनः अनेक प्रकार से युद्ध हुआ। श्रीरघुनाथजी वृक्ष की आड़ से देख रहे थे।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।

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बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार