मंत्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं
मंत्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं
चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
मंत्रिन्ह पुर देखा बिनु साईं। दीन्हेउ मोहि राज बरिआईं॥ बाली ताहि मारि गृह आवा। देखि मोहि जियँ भेद बढ़ावा॥ ५ ॥
अर्थ
मन्त्रियों ने नगर को बिना स्वामी (राजा) का देखा, तो मुझको जबरदस्ती राज्य दे दिया। बालि उसे मारकर घर आ गया। मुझे देखकर उसने हृदय में भेद बढ़ाया (बहुत ही विरोध माना)।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव का दुःख-संवाद, बालि वध की प्रतिज्ञा और सच्चे मित्र के लक्षणों पर श्रीराम का उपदेश का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा