रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी

चौपाई ६, दोहा ६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

रिपु सम मोहि मारेसि अति भारी। हरि लीन्हेसि सर्बसु अरु नारी॥ ताकें भय रघुबीर कृपाला। सकल भुवन मैं फिरेउँ बिहाला॥ ६ ॥

अर्थ

उसने मुझे शत्रु के समान बहुत अधिक मारा और मेरा सर्वस्व तथा मेरी स्त्री भी छीन ली। हे कृपालु रघुवीर! मैं उसके भय से समस्त भुवनों में बेहाल होकर फिरता रहा।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव का दुःख-संवाद, बालि वध की प्रतिज्ञा और सच्चे मित्र के लक्षणों पर श्रीराम का उपदेश का वर्णन है।

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सुग्रीव का दुःख और बालि वध की प्रतिज्ञा