मंगलरूप भयउ बन तब ते
मंगलरूप भयउ बन तब ते
चौपाई ३, दोहा १३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
मंगलरूप भयउ बन तब ते। कीन्ह निवास रमापति जब ते॥ फटिक सिला अति सुभ्र सुहाई। सुख आसीन तहाँ द्वौ भाई॥ ३ ॥
अर्थ
जब से रमापति श्रीरामजी ने वहाँ निवास किया तब से वन मंगलस्वरूप हो गया। सुन्दर स्फटिक मणि की एक अत्यन्त उज्ज्वल शिला है, उस पर दोनों भाई सुखपूर्वक विराजमान हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “वर्षा ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा ऋतु में मेघ, पर्वत, वन और प्रकृति के सौंदर्य तथा विरह-भावों का वर्णन है।
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वर्षा ऋतु वर्णन