देखि मनोहर सैल अनूपा

चौपाई २, दोहा १३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि मनोहर सैल अनूपा। रहे तहँ अनुज सहित सुरभूपा॥ मधुकर खग मृग तनु धरि देवा। करहिं सिद्ध मुनि प्रभु कै सेवा॥ २ ॥

अर्थ

मनोहर और अनुपम पर्वत को देखकर देवताओं के सम्राट्‌ श्रीरामजी छोटे भाई सहित वहाँ रह गये। देवता, सिद्ध और मुनि भौंरों, पक्षियों और पशुओं के शरीर धारण करके प्रभु की सेवा करने लगे।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “वर्षा ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा ऋतु में मेघ, पर्वत, वन और प्रकृति के सौंदर्य तथा विरह-भावों का वर्णन है।

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वर्षा ऋतु वर्णन