कहत अनुज सन कथा अनेका

चौपाई ४, दोहा १३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

कहत अनुज सन कथा अनेका। भगति बिरति नृपनीति बिबेका॥ बरषा काल मेघ नभ छाए। गरजत लागत परम सुहाए॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामजी छोटे भाई लक्ष्मणजी से भक्ति, वैराग्य, राजनीति और ज्ञान की अनेकों कथाएँ कहते हैं। वर्षाकाल में आकाश में छाये हुए बादल गरजते हुए बहुत ही सुहावने लगते हैं।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “वर्षा ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा ऋतु में मेघ, पर्वत, वन और प्रकृति के सौंदर्य तथा विरह-भावों का वर्णन है।

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वर्षा ऋतु वर्णन