लै सुग्रीव संग रघुनाथा

चौपाई १३, दोहा ७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

लै सुग्रीव संग रघुनाथा। चले चाप सायक गहि हाथा॥ तब रघुपति सुग्रीव पठावा। गर्जेसि जाइ निकट बल पावा॥ १३ ॥

अर्थ

तदनन्तर सुग्रीव को साथ लेकर और हाथों में धनुष-बाण धारण करके श्रीरघुनाथजी चले। तब श्रीरघुनाथजी ने सुग्रीव को बालि के पास भेजा। वह श्रीरामजी का बल पाकर बालि के निकट जाकर गरजा।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का वैराग्य” प्रकरण का चौपाई १३, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव के वैराग्य और प्रभु-शरण के संकल्प का जागरण का वर्णन है।

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सुग्रीव का वैराग्य