सुनत बालि क्रोधातुर धावा

चौपाई १४, दोहा ७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत बालि क्रोधातुर धावा। गहि कर चरन नारि समुझावा॥ सुनु पति जिन्हहि मिलेउ सुग्रीवा। ते द्वौ बंधु तेज बल सींवा॥ १४ ॥

अर्थ

बालि सुनते ही क्रोध में भरकर वेग से दौड़ा। उसकी स्त्री तारा ने चरण पकड़कर उसे समझाया कि हे नाथ! सुनिए, सुग्रीव जिनसे मिले हैं वे दोनों भाई तेज और बल की सीमा हैं।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का वैराग्य” प्रकरण का चौपाई १४, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव के वैराग्य और प्रभु-शरण के संकल्प का जागरण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
सुग्रीव का वैराग्य