लागि तृषा अतिसय अकुलाने
लागि तृषा अतिसय अकुलाने
चौपाई २, दोहा २४ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
लागि तृषा अतिसय अकुलाने। मिलइ न जल घन गहन भुलाने॥ मन हनुमान कीन्ह अनुमाना। मरन चहत सब बिनु जल पाना॥ २ ॥
अर्थ
इतने में ही सबको अत्यन्त प्यास लगी, जिससे सब अत्यन्त ही व्याकुल हो गये। किन्तु जल कहीं नहीं मिला। घने जंगल में सब भटक गये। हनुमानजी ने मन में अनुमान किया कि जल पिये बिना सब लोग मरना ही चाहते हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान