कतहुँ होइ निसिचर सैं भेंटा

चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

कतहुँ होइ निसिचर सैं भेंटा। प्रान लेहिं एक एक चपेटा॥ बहु प्रकार गिरि कानन हेरहिं। कोउ मुनि मिलइ ताहि सब घेरहिं॥ १ ॥

अर्थ

कहीं किसी राक्षस से भेंट हो जाती है, तो एक-एक चपत में ही उसके प्राण ले लेते हैं। पर्वतों और वनों को बहुत प्रकार से खोज रहे हैं। कोई मुनि मिल जाता है तो पता पूछने के लिये उसे सब घेर लेते हैं।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान