चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा
चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा
चौपाई ३, दोहा २४ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
चढ़ि गिरि सिखर चहूँ दिसि देखा। भूमि बिबर एक कौतुक पेखा॥ चक्रबाक बक हंस उड़ाहीं। बहुतक खग प्रबिसहिं तेहि माहीं॥ ३ ॥
अर्थ
उन्होंने पहाड़ की चोटी पर चढ़कर चारों ओर देखा तो पृथ्वी के भीतर एक गुफा में उन्हें एक कौतुक (आश्चर्य) दिखायी दिया। उसके ऊपर चकवे, बगुले और हंस उड़ रहे हैं और बहुत-से पक्षी उसमें प्रवेश कर रहे हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान