करि बिनती मंदिर लै आए

चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

करि बिनती मंदिर लै आए। चरन पखारि पलँग बैठाए॥ तब कपीस चरनन्हि सिरु नावा। गहि भुज लछिमन कंठ लगावा॥ ३ ॥

अर्थ

वे विनती करके उन्हें महल में ले आये तथा चरणों को धोकर उन्हें पलँग पर बैठाया। तब वानरराज सुग्रीव ने उनके चरणों में सिर नवाया और लक्ष्मणजी ने हाथ पकड़कर उनको गले से लगा लिया।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा बाद सुग्रीव की उदासीनता पर राम का असंतोष और लक्ष्मण का कोपसहित किष्किंधा-प्रस्थान का वर्णन है।

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सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप