नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं
नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं
चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
नाथ बिषय सम मद कछु नाहीं। मुनि मन मोह करइ छन माहीं॥ सुनत बिनीत बचन सुख पावा। लछिमन तेहि बहु बिधि समुझावा॥ ४ ॥
अर्थ
[सुग्रीव ने कहा--] हे नाथ! विषय के समान और कोई मद नहीं है। यह मुनियों के मन में भी क्षणमात्र में मोह उत्पन्न कर देता है [फिर मैं तो विषयी जीव ही ठहरा]। सुग्रीव के विनययुक्त वचन सुनकर लक्ष्मणजी ने सुख पाया और उनको बहुत प्रकार से समझाया।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा बाद सुग्रीव की उदासीनता पर राम का असंतोष और लक्ष्मण का कोपसहित किष्किंधा-प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप