डरपे गीध बचन सुनि काना
डरपे गीध बचन सुनि काना
चौपाई ३, दोहा २७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
डरपे गीध बचन सुनि काना। अब भा मरन सत्य हम जाना॥ कपि सब उठे गीध कहँ देखी। जामवंत मन सोच बिसेषी॥ ३ ॥
अर्थ
गीध के वचन कानों से सुनते ही सब डर गये कि अब सचमुच ही मरना हो गया, यह हमने जान लिया। फिर उस गीध (सम्पाती) को देखकर सब वानर उठ खड़े हुए। जाम्बवान के मन में विशेष सोच हुआ।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार