जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं
जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं
चौपाई २, दोहा १० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
जन्म जन्म मुनि जतनु कराहीं। अंत राम कहि आवत नाहीं॥ जासु नाम बल संकर कासी। देत सबहि सम गति अबिनासी॥ २ ॥
अर्थ
मुनिगण जन्म-जन्म में (प्रत्येक जन्म में) [अनेकों प्रकार का] साधन करते रहते हैं। फिर भी अन्तकाल में उन्हें 'राम' नहीं कह आता (उनके मुख से रामनाम नहीं निकलता)। जिनके नाम के बल से शंकरजी काशी में सबको समान रूप से अविनाशिनी गति (मुक्ति) देते हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार