सुनत राम अति कोमल बानी

चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत राम अति कोमल बानी। बालि सीस परसेउ निज पानी॥ अचल करौं तनु राखहु प्राना। बालि कहा सुनु कृपानिधाना॥ १ ॥

अर्थ

बालि की अत्यन्त कोमल वाणी सुनकर श्रीरामजी ने उसके सिर को अपने हाथ से स्पर्श किया [और कहा--] मैं तुम्हारे शरीर को अचल कर दूँ, तुम प्राणों को रखो। बालि ने कहा--हे कृपानिधान! सुनिये--।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में बालि-सुग्रीव युद्ध, राम द्वारा बालि वध, और बालि को परम गति की प्राप्ति का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि उद्धार