जामवंत अंगद दुख देखी

चौपाई ६, दोहा २६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

जामवंत अंगद दुख देखी। कहीं कथा उपदेस बिसेषी॥ तात राम कहुँ नर जनि मानहु। निर्गुन ब्रह्म अजित अज जानहु॥ ६ ॥

अर्थ

जाम्बवान ने अंगद का दुःख देखकर विशेष उपदेश की कथाएँ कहीं। [वे बोले--] हे तात! श्रीरामजी को मनुष्य न मानो, उन्हें निर्गुण ब्रह्म, अजेय और अजन्मा समझो।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।

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संपाती से भेंट और सीता के समाचार