हम सब सेवक अति बड़भागी
हम सब सेवक अति बड़भागी
चौपाई ७, दोहा २६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
हम सब सेवक अति बड़भागी। संतत सगुन ब्रह्म अनुरागी॥ ७ ॥
अर्थ
हम सब सेवक अत्यन्त बड़भागी हैं, जो निरन्तर सगुण ब्रह्म (श्रीरामजी) में प्रीति रखते हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार