हम सीता कै सुधि लीन्हें बिना
हम सीता कै सुधि लीन्हें बिना
चौपाई ५, दोहा २६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
हम सीता कै सुधि लीन्हें बिना। नहिं जैहैं जुबराज प्रबीना॥ अस कहि लवन सिंधु तट जाई। बैठे कपि सब दर्भ डसाई॥ ५ ॥
अर्थ
हे सुयोग्य युवराज! हम लोग सीताजी की खोज लिये बिना नहीं लौटेंगे। ऐसा कहकर लवणसागर के तट पर जाकर सब वानर कुश बिछाकर बैठ गये।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार