इहाँ बिचारहिं कपि मन माहीं
इहाँ बिचारहिं कपि मन माहीं
चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ बिचारहिं कपि मन माहीं। बीती अवधि काज कछु नाहीं॥ सब मिलि कहहिं परस्पर बाता। बिनु सुधि लएँ करब का भ्राता॥ १ ॥
अर्थ
यहाँ वानरगण मन में विचार कर रहे हैं कि अवधि तो बीत गयी; पर काम कुछ न हुआ। सब मिलकर आपस में बात करने लगे कि हे भाई! अब तो सीताजी की खबर लिये बिना लौटकर भी क्या करेंगे?
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार