कह अंगद लोचन भरि बारी

चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

कह अंगद लोचन भरि बारी। दुहुँ प्रकार भइ मृत्यु हमारी॥ इहाँ न सुधि सीता कै पाई। उहाँ गएँ मारिहि कपिराई॥ २ ॥

अर्थ

अंगद ने नेत्रों में जल भरकर कहा कि दोनों ही प्रकार से हमारी मृत्यु हुई। यहाँ तो सीताजी की सुध नहीं मिली और वहाँ जाने पर वानरराज हमें मार डालेंगे।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
संपाती से भेंट और सीता के समाचार