इहाँ हरी निसिचर बैदेही

चौपाई २, दोहा २ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

इहाँ हरी निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही॥ आपन चरित कहा हम गाई। कहहु बिप्र निज कथा बुझाई॥ २ ॥

अर्थ

यहाँ (वन में) राक्षस ने [मेरी पत्नी] वैदेही को हर लिया। हे ब्राह्मण! हम उसे ही खोजते फिरते हैं। हमने अपना चरित्र कह सुनाया। अब हे ब्राह्मण! अपनी कथा समझाकर कहिए।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी और श्रीराम के मिलन तथा अग्नि को साक्षी मानकर राम-सुग्रीव की पवित्र मित्रता स्थापित होने का वर्णन है।

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हनुमानजी-राम मिलन और राम-सुग्रीव मित्रता