अंगद बचन सुनत कपि बीरा
अंगद बचन सुनत कपि बीरा
चौपाई ४, दोहा २६ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
अंगद बचन सुनत कपि बीरा। बोलि न सकहिं नयन बह नीरा॥ छन एक सोच मगन होइ रहे। पुनि अस बचन कहत सब भए॥ ४ ॥
अर्थ
वानर वीर अंगद के वचन सुनते हैं; किन्तु कुछ बोल नहीं सकते। उनके नेत्रों से जल बह रहा है। एक क्षण के लिये सब सोच में मग्न हो रहे। फिर सब ऐसा वचन कहने लगे--।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार