एहि बिधि कथा कहहिं बहु भाँती

चौपाई १, दोहा २७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि कथा कहहिं बहु भाँती। गिरि कंदराँ सुनी संपाती॥ बाहेर होइ देखि बहु कीसा। मोहि अहार दीन्ह जगदीसा॥ १ ॥

अर्थ

इस प्रकार जाम्बवान बहुत प्रकार से कथाएँ कह रहे हैं। इनकी बातें पर्वत की कन्दरा में सम्पाती ने सुनीं। बाहर निकलकर उसने बहुत-से वानर देखे। [तब वह बोला--] जगदीश्वर ने मुझे घर बैठे बहुत-सा आहार भेज दिया!

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।

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संपाती से भेंट और सीता के समाचार