आजु सबहि कहँ भच्छन करऊँ
आजु सबहि कहँ भच्छन करऊँ
चौपाई २, दोहा २७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
आजु सबहि कहँ भच्छन करऊँ। दिन बहु चले अहार बिनु मरऊँ॥ कबहुँ न मिल भरि उदर अहारा। आजु दीन्ह बिधि एकहिं बारा॥ २ ॥
अर्थ
आज इन सब को खा जाऊँगा। बहुत दिन बीत गये, भोजन के बिना मर रहा था। पेट भर भोजन कभी नहीं मिलता। आज विधाता ने एक ही बार में बहुत-सा भोजन दे दिया।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “संपाती से भेंट और सीता के समाचार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्रतट पर वानरों की संपाती से भेंट और सीताजी के लंका में होने के समाचार का वर्णन है।
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संपाती से भेंट और सीता के समाचार