ए सब राम भगति के बाधक
ए सब राम भगति के बाधक
चौपाई ९, दोहा ७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
ए सब राम भगति के बाधक। कहहिं संत तव पद अवराधक॥ सत्रु मित्र सुख दुख जग माहीं। मायाकृत परमारथ नाहीं॥ ९ ॥
अर्थ
क्योंकि आपके चरणों की आराधना करनेवाले संत कहते हैं कि ये सब (सुख-सम्पत्ति आदि) रामभक्ति के विरोधी हैं। जगत् में जितने भी शत्रु, मित्र और सुख-दुःख [आदि द्वन्द्व] हैं, सब मायारचित हैं, परमार्थतः (वास्तव में) नहीं हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का वैराग्य” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव के वैराग्य और प्रभु-शरण के संकल्प का जागरण का वर्णन है।
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सुग्रीव का वैराग्य