उपजा ग्यान बचन तब बोला
उपजा ग्यान बचन तब बोला
चौपाई ८, दोहा ७ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
उपजा ग्यान बचन तब बोला। नाथ कृपाँ मन भयउ अलोला॥ सुख संपति परिवार बड़ाई। सब परिहरि करिहउँ सेवकाई॥ ८ ॥
अर्थ
जब ज्ञान उत्पन्न हुआ तब वे ये वचन बोले कि हे नाथ! आपको कृपा से अब मेरा मन स्थिर हो गया। सुख, सम्पत्ति, परिवार और बड़ाई (बड़प्पन) सबको त्यागकर मैं आपकी सेवा ही करूँगा।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव का वैराग्य” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव के वैराग्य और प्रभु-शरण के संकल्प का जागरण का वर्णन है।
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सुग्रीव का वैराग्य