सुंदर बन कुसुमित अति सोभा
सुंदर बन कुसुमित अति सोभा
चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुंदर बन कुसुमित अति सोभा। गुंजत मधुप निकर मधु लोभा॥ कंद मूल फल पत्र सुहाए। भए बहुत जब ते प्रभु आए ॥ १ ॥
अर्थ
सुन्दर वन फूला हुआ अत्यन्त सुशोभित है। मधु के लोभ से भौंरों के समूह गुंजार कर रहे हैं। जब से प्रभु आये, तब से वन में सुन्दर कन्द, मूल, फल और पत्तों की बहुतायत हो गयी।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “वर्षा ऋतु वर्णन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा ऋतु में मेघ, पर्वत, वन और प्रकृति के सौंदर्य तथा विरह-भावों का वर्णन है।
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वर्षा ऋतु वर्णन