गिरि ते उतरि पवनसुत आवा
गिरि ते उतरि पवनसुत आवा
चौपाई ४, दोहा २४ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
गिरि ते उतरि पवनसुत आवा। सब कहुँ लै सोइ बिबर देखावा॥ आगें कै हनुमंतहि लीन्हा। पैठे बिबर बिलंबु न कीन्हा॥ ४ ॥
अर्थ
पवनकुमार हनुमानजी पर्वत से उतर आये और सबको ले जाकर उन्होंने वह गुफा दिखलायी। सबने हनुमानजी को आगे कर लिया और वे गुफा में घुस गये, देर नहीं की।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान