चरन नाइ सिरु बिनती कीन्ही
चरन नाइ सिरु बिनती कीन्ही
चौपाई १, दोहा २० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
चरन नाइ सिरु बिनती कीन्ही। लछिमन अभय बाँह तेहि दीन्ही॥ क्रोधवंत लछिमन सुनि काना। कह कपीस अति भयँ अकुलाना॥ १ ॥
अर्थ
अंगद ने उनके चरणों में सिर नवाकर विनती की (क्षमायाचना की)। तब लक्ष्मणजी ने उनको अभय बाँह दी (भुजा उठाकर कहा कि डरो मत)। सुग्रीव ने अपने कानों से लक्ष्मणजी को क्रोधयुक्त सुनकर भय से अत्यन्त व्याकुल होकर कहा--।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वर्षा बाद सुग्रीव की उदासीनता पर राम का असंतोष और लक्ष्मण का कोपसहित किष्किंधा-प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव पर राम की नाराजी, लक्ष्मण का कोप