बानर कटक उमा मैं देखा
बानर कटक उमा मैं देखा
चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड
चौपाई पाठ
बानर कटक उमा मैं देखा। सो मूरुख जो करन चह लेखा॥ आइ राम पद नावहिं माथा। निरखि बदनु सब होहिं सनाथा॥ १ ॥
अर्थ
शिवजी कहते हैं--हे उमा! वानरों की वह सेना मैंने देखी थी। उसकी जो गिनती करना चाहे वह महान् मूर्ख है। सब वानर आकर श्रीरामजी के चरणों में मस्तक नवाते हैं और [सौन्दर्य-माधुर्यनिधि] श्रीमुख के दर्शन करके कृतार्थ होते हैं।
संदर्भ
यह किष्किन्धाकाण्ड के “सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुग्रीव-राम संवाद और सीताजी की खोज हेतु वानर दलों का चारों दिशाओं में प्रस्थान का वर्णन है।
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सुग्रीव-राम संवाद और वानरों का प्रस्थान