बलि बाँधत प्रभु बाढ़ेउ सो तनु

दोहा २९ · किष्किन्धाकाण्ड

दोहा पाठ

बलि बाँधत प्रभु बाढ़ेउ सो तनु बरनि न जाइ। उभय घरी महँ दीन्हीं सात प्रदच्छिन धाइ॥ २९ ॥

अर्थ

बलि के बाँधते समय प्रभु इतने बढ़े कि उस शरीर का वर्णन नहीं हो सकता, किन्तु मैंने दो ही घड़ी में दौड़कर [उस शरीर की] सात प्रदक्षिणाएँ कर लीं।

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना” प्रकरण का दोहा २९ है। इस प्रकरण में जांबवंत द्वारा हनुमानजी को उनका अपार बल और सामर्थ्य याद दिलाकर समुद्र लांघने के लिए प्रेरित करने का वर्णन है।

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जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना