अंगद कहइ जाउँ मैं पारा

चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत · किष्किन्धाकाण्ड

चौपाई पाठ

अंगद कहइ जाउँ मैं पारा। जियँ संसय कछु फिरती बारा॥ जामवंत कह तुम्ह सब लायक। पठइअ किमि सबही कर नायक॥ १ ॥

अर्थ

अंगद ने कहा-मैं पार तो चला जाऊँगा। परन्तु लौटते समय के लिये हृदय में कुछ सन्देह है। जाम्बवान ने कहा--तुम सब प्रकार से योग्य हो। परन्तु तुम सब के नेता हो, तुम्हें कैसे भेजा जाय?

संदर्भ

यह किष्किन्धाकाण्ड के “जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जांबवंत द्वारा हनुमानजी को उनका अपार बल और सामर्थ्य याद दिलाकर समुद्र लांघने के लिए प्रेरित करने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
जांबवंत का हनुमानजी को उत्साहित करना